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Seeking blessings of Lord Ganesha to remove obstacles, grant wisdom, and ensure success in all endeavors.
गणेश चालीसा
When to recite: Before any new work, Wednesday, Ganesh Chaturthi, daily morning
Ganesh Chalisa is a devotional hymn to Sri Ganesha, the first-worshipped Lord invoked before beginnings. It is recited before study, travel, business, writing, puja, and new undertakings where devotees seek clear intelligence and removal of obstacles.
The chalisa praises Ganesha as Ganapati, Vinayaka, Gajanan, son of Shiva and Parvati, giver of riddhi and siddhi, and the one whose worship makes auspicious work complete.
The hymn asks Ganesha to remove obstacles across lifetimes, bless learning, protect the devotee's work, and bring auspiciousness. Its mood is practical and devotional: begin with humility, seek wisdom, and let the work proceed under Ganesha's grace.
Devanagari / Hindi script
॥ दोहा ॥ जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥ ॥ चौपाई ॥ जय जय जय गणपति गणराजू। मंगल भरण करण शुभ काजू॥ जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥ वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥ राजत मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥ पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥ सुन्दर पीताम्बर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥ धनि शिव सुवन षडानन भ्राता। गौरी ललन विश्वविख्याता॥ ऋद्धि सिद्धि तव चँवर सुधारें। मूषक वाहन सोहत द्वारें॥ कहौं जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुचि पावन मंगलकारी॥ एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हो भारी॥ भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुँच्यो तुम धरि द्विज रूपा॥ अतिथि जानि कै गौरि सुखारी। बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥ अति प्रसन्न है कह्यो भवानी। माँगु माँगु वर गुणमणि ज्ञानी॥ सब प्रथम मोहि दे शिशु नाथा। बलुआ भोला भाल विधाता॥ गणना करत तुम्हारो नाम लें। जन्म जन्म का विघ्न हरो गण॥ अस कहि अन्तर्ध्यान रूप हो। पलक पाँवड़े पुत्र भयो सो॥ बालक को निरखि सुखारे सुत। मातु पिता विधि नाम धरत हैं॥ मंगल मूरति मारुत नन्दन। गणेश जय मंगल घटस्थापन॥ विद्यारम्भ करत पूजन तव। प्रथम पूजनीय गणेश सदा॥ सब के ऊपर पूजित होते। सुर नर मुनि नित ध्यान धरोते॥ हाथी मुख लम्बोदर जग में। दूसर नहीं जुग जुग सेवकगण॥ सफल करो मेरे काज प्रभु। मेरो नाम न आवे लाज प्रभु॥ कृपा करो गणपति अति भारी। पूर्ण करो सब आशा हमारी॥ जय जय जय विनायक महाराजा। जग में मंगल करो सदा काजा॥