Hindi / Sanskrit Text
॥ दोहा ॥ कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माल अनूप। पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र रवि रूप॥ ॥ चौपाई ॥ जय सूर्य देव भास्कर भानू। जय जय जय जगत कल्याणू॥ इन्द्र ब्रह्मा शिव बड़ भागी। तेरे गुण गाते अनुरागी॥ मित्र रूप दिनकर दाता। तुम जगत के हो विधाता॥ तुम सम तेज न और कोई। जग में प्रकाश तुमसे होई॥ आरोग्य देत सब रोग नसाये। भक्तन को सब सिद्धि दिलाये॥ सात अश्वों का रथ है सुंदर। ऊषा संग चलते हो मनहर॥ पिंगला और उच्छिष्ट तेरे। दिशा सभी हैं दास हैं तेरे॥ रवि रविवार व्रत करे जो कोई। तासु मनोरथ सिद्ध हो सोई॥ सूर्य चालीसा जो नित गाये। सूर्य कृपा तासु फल पाये॥