Hindi / Sanskrit Text
पहले शीश नमाऊं मैं, गुरुपद कमल मनाय। साईं जो शिर्डी विराजे, त्रिभुवन दो वरदाय॥ जय साईं राम जय साईं राम। सबके स्वामी एक तुम, सबके पालनहार॥ शिर्डी में आकर बसे, लीला की अपरम्पार। हिन्दू मुस्लिम सिख सभी, करते तुम्हें नमस्कार॥ द्वारकामाई में बैठे, जलाते धूनी नित्य। भक्तों के दुख हरते, करते हैं शुभ नित्य॥ श्रद्धा और सबुरी, यही दो पथ बताए। जो इन पर चला साईं, उसे मंज़िल दिलाए॥ साईं बोले सब एक हैं, ईश्वर और अल्लाह। प्रेम से पूजो सबको, यही है सच्चा राह॥ चालीसा साईं का, जो नित पढ़े इसे। मनवांछित फल पाए वो, साईं कृपा मिले॥